
जालंधर ब्रीज: पंजाब के किसानों को मुहैया करवाई जा रही मुफ़्त बिजली की सुविधा वापिस लेने के दोषों को शुरू से ही रद्द करते हुये पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने शनिवार को कहा कि उनकी सरकार केंद्र की तरफ से पेश किये वित्तीय घाटे के वृद्धि के हिस्से को छोडऩे के लिए तैयार है परन्तु किसी भी कीमत पर किसानों के हितों के साथ समझौता नहीं करेगी।
केंद्र की तरफ से मुफ़्त बिजली के विकल्प के तौर पर किसानों को डी.बी.टी. के द्वारा फ़ायदा देने के सुझाव को सिरे से ख़ारिज करते हुये मुख्यमंत्री ने कहा कि इसको वह बिल्कुल भी नहीं सहेंगे और यह सीधे तौर पर देश के संघीय ढांचे पर हमला है। उन्होंने कहा कि वह यह मामला केंद्र के पास उठाएंगे कि कोविड महामारी के चलते वित्तीय सहायता बढ़ाने की आड़ में वित्तीय घाटा बरदाश्त कर रहे राज्यों में किसान विरोधी शर्त लागू नहीं कर सकते।
कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने किसानों को विश्वास दिलाते हुये कहा कि जब तक उनकी सरकार सत्ता में है, किसानों को मुफ़्त बिजली की सुविधा मिलती रहेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार वित्तीय घाटे को पूरा करने के लिए कजऱ् लेगी और भारत सरकार राज्य सरकार पर अधिकारित कजऱ् लेने के लिए शर्तें थोप नहीं सकती।
कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने अकाली दल के प्रधान सुखबीर बादल पर बरसते हुये कहा कि वह केंद्र सरकार के दुष्कर्मों का दोष राज्य सरकार पर न मढ़ें। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार मार्च 2017 में सत्ता में आने के बाद किसानों को निर्विघ्न मुफ़्त बिजली की सुविधा दे रही है, चाहे अकाली -भाजपा के 10 साल के कुशासन के चलते राज्य बुरी तरह वित्तीय संकटों में घिरा हुआ है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार की तरफ से राज्यों को मुफ़्त बिजली वापिस लेने के लिए निर्देश दिए जा रहे हैं जबकि कोविड और लॉकडाऊन में राज्य और यहाँ के लोगों को किसी भी तरह की राहत देने में केंद्र सरकार फैल साबित हुई है। उन्होंने सुखबीर को कहा कि केंद्र में वह हिस्सेदार होने के नाते पहला वह अकाली दल का एन.डी.ए. से नाता तोड़ेें। उन्होंने केंद्रीय मंत्री और अकाली नेता हरिसमरत कौर बादल के केंद्रीय कैबिनेट में से इस्तीफे की भी माँग की।
अकालियों की तरफ से लगाऐ गए दोषों को पूरी तरह बेबुनियाद बताते हुये कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने केंद्र या संसद में किसानों समेत पंजाब और यहाँ के लोगों के हकों के लिए आवाज़ न उठाने पर अकाली लीडरशिप की सख्त आलोचना की। उन्होंने कहा कि पंजाब के भले की बात करने के समय पर अकाली चुप्पी नहीं तोड़ते जबकि राष्ट्रीय सरोकार के गंभीर मुद्दों पर भी घटिया और शर्मनाक राजनीति खेलने से बाज़ नहीं आते।
सुखबीर बादल और हरसिमरत कौर की तरफ से दोहरे मापदण्डों, कोरे झूठे और निराधार दोषों से पंजाब के लोगों को गुमराह करने की घटिया चालें चलने की निंदा करते हुये मुख्यमंत्री ने कहा, ‘यदि आपको जरा सी भी शर्म आती है, तो आपकों तुरंत एन.डी.ए. गठजोड़ से नाता तोड़ कर राज्य के लोगों के लिए काम कर रही मेरी सरकार के साथ जुड़ जाना चाहिए।’मुख्यमंत्री ने नागरिकता संशोधन एक्ट (सी.ए.ए) के मौके भी अकाली दल के पाखंड को याद करते हुये कहा कि इस एक्ट के विरुद्ध सार्वजनिक आवाज़ उठाने से पहले अकालियों ने संसद में एक्ट के हक में मेज़ थपथपाया था। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वाभाविक है कि सुखबीर और हरसिमरत और उनकी पार्टी के असूल ही नहीं हैं और वह सिफऱ् अपने निजी और राजनैतिक स्वार्थों में रूचि रखते हैं।
कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने स्पष्ट किया कि मंत्रीमंडल ने अपनी पिछली मीटिंग के दौरान भारत सरकार की तरफ से तय की गई प्रक्रिया के मुताबिक कोविड -19 के दरमियान सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जी.एस.डी.पी.) का 1.5 प्रतिशत अतिरिक्त कजऱ् लेने के योग्य बनने के लिए कुछ संशोधनों के लिए सैद्धांतिक मंजूरी दी थी। भारत सरकार ने एफ.आर.बी.एम. एक्ट के अंतर्गत राज्यों के वित्तीय घाटे को 3 प्रतिशत से बढ़ा कर 5 प्रतिशत करने की मंजूरी देते हुये इसके एक हिस्से को कुछ प्रशासकीय सुधारों के साथ जोड़ दिया था।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा और उसकी हिस्सेदार अकाली दल यह स्पष्ट करें कि पंजाब पर ऐसी शर्त थोप कर दबाव डालने की कोशिश क्यों की गई।इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को एक ट्वीट के द्वारा स्पष्ट कर दिया था, ‘मैं अपने किसानों को भरोसा दिलाता हूं कि पंजाब में कृषि के लिए मुफ़्त बिजली की सुविधा वापस लेने की कोई योजना नहीं हंै। मैं आपकी आर्थिक हालत से भली-भांत अवगत हूँ और मुल्क के लिए अनाज पैदा करने के लिए आपकी की तरफ से हर फ़सल के लिए की जा रही सख्त मेहनत की सराहना करता हूँ।
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